मोबाइल चार्जर ज़्यादातर ब्लैक और व्हाइट ही क्यों बनाए जाते हैं? जानिए असली वजह
आज के समय में मार्केट में उपलब्ध ज़्यादातर मोबाइल चार्जर ब्लैक और व्हाइट रंग में ही दिखाई देते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कंपनियां हमेशा इन्हीं दो रंगों पर ज़ोर क्यों देती हैं? इसके पीछे एक बड़ा कारण होता है।मोबाइल चार्जर को बाज़ार में लॉन्च करने से पहले कंपनियों को कई सेफ्टी टेस्ट पास करने होते हैं। इन टेस्ट में चार्जर की मजबूत प्लास्टिक क्वालिटी, उसकी सुरक्षा और उसकी हीट-रेजिस्टेंस क्षमता जांची जाती है। न्यूट्रल रंगों यानी ब्लैक और व्हाइट में उपयोग होने वाले प्लास्टिक फ़ॉर्मूले पहले से टेस्टेड और सेफ माने जाते हैं। इसलिए इन रंगों को मंजूरी जल्दी मिल जाती है और उत्पादन भी आसानी से हो जाता है।इसके अलावा ब्लैक और व्हाइट कलर हीट मैनेजमेंट में भी मदद करते हैं। इन रंगों की वजह से चार्जर से निकलने वाली गर्मी जल्दी खत्म हो सकती है, जिससे चार्जर में हीट ट्रैप होने की संभावना कम रहती है। यही वजह है कि चार्जिंग के दौरान जनरेट होने वाली गर्मी चार्जर के अंदर जमा नहीं होती और डिवाइस सुरक्षित रहती है।इसी कारण मोबाइल कंपनियां बिना जोखिम उठाए ज़्यादातर चार्जर ब्लैक और व्हाइट रंग में ही बनाती हैं, क्योंकि वे पहले से प्रमाणित, सुरक्षित और भरोसेमंद विकल्प साबित होते हैं।

